भिवानी, 04 मई। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के चेयरमैन एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश डी.आर. चालिया के निर्देशानुसार मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम)-कम-सचिव पवन कुमार ने सोमवार को जिले के बाल सेवा आश्रम, सखी वन स्टॉप सेंटर और नशा मुक्ति केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दोनों संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं, उपचार प्रक्रियाओं, परामर्श सेवाओं तथा पुनर्वास व्यवस्थाओं का गहनता से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बाल सेवा आश्रम के निरीक्षण के दौरान सीजेएम ने बच्चों के आवास, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तारपूर्वक समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि आश्रम में रह रहे बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनके समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा सके।इसके उपरांत सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण करते हुए पवन कुमार ने महिलाओं के लिए उपलब्ध चिकित्सकीय सहायता, कानूनी परामर्श, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, अस्थायी आवास और पुनर्वास सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पीड़ित महिलाओं को त्वरित, संवेदनशील और गोपनीय सहायता प्रदान की जाए तथा उनकी गरिमा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाए। सीजेएम पवन कुमार ने कहा कि बाल सेवा आश्रम और सखी वन स्टॉप सेंटर समाज के कमजोर वर्गों के संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थान हैं। इन केंद्रों की व्यवस्थाओं को मजबूत और प्रभावी बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
– सीजेएम पवन कुमार ने नशा मुक्ति केंद्र के निरीक्षण के दौरान यहां उपलब्ध व्यवस्थाओं, उपचार प्रक्रियाओं, चिकित्सकीय परामर्श सेवाओं तथा पुनर्वास सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती मरीजों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनके इलाज, दैनिक दिनचर्या, परामर्श सत्रों की प्रभावशीलता और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करने वाली गंभीर सामाजिक बुराई है। नशे की लत व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और सामाजिक रूप से कमजोर बना देती है। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति केंद्र समाज के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति केवल दवाइयों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए नियमित चिकित्सकीय परामर्श के साथ-साथ परिवार के सहयोग की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने निर्देश दिए कि मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा, संतुलित आहार, स्वच्छ वातावरण और प्रभावी काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाए।

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